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रक्षाबंधन गंगा स्नान और संत मिलन ने धर्मनगरी को बनाया अध्यात्म का केंद्र

haridwar 28/8/2026

हरिद्वार। सावन माह की पूर्णिमा पर धर्मनगरी में आस्था अध्यात्म और भाई बहन के अटूट प्रेम का अद्भुत संगम देखने को मिला। एक ओर लाखों श्रद्धालुओं ने मां गंगा में पुण्य स्नान कर भगवान शिव और विष्णु की आराधना की, तो दूसरी ओर रक्षाबंधन के पावन पर्व पर बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर सुख समृद्धि और दीर्घायु की कामना की। महामंडलेश्वर स्वामी सोमेश्वरानंद गिरि महाराज ने कहा कि रक्षाबंधन केवल एक पर्व नहीं बल्कि भाई-बहन के अटूट विश्वास स्नेह और रक्षा के संकल्प का प्रतीक है। सावन पूर्णिमा का यह दिन सनातन परंपरा में विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। संत सम्मेलन के दौरान वेद मंत्रों भजन-कीर्तन और धार्मिक चर्चाओं से आश्रम परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। श्रद्धालुओं ने संतों का आशीर्वाद लेकर परिवार की सुख-शांति और राष्ट्र की समृद्धि की कामना की।हर की पैड़ी सहित गंगा घाटों पर तड़के से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर दान-पुण्य किया और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई। सुरक्षा व्यवस्था के बीच पूरा शहर श्रद्धा और उत्साह से सराबोर नजर आया। सावन की विदाई पूर्णिमा का पुण्य काल और रक्षाबंधन का पावन उत्सव इन तीनों के दुर्लभ संयोग ने हरिद्वार को एक बार फिर सनातन आस्था की जीवंत राजधानी बना दिया। आज धर्मनगरी में हर ओर गूंजते मंत्र बहनों की राखियां और संतों का सान्निध्य भारतीय संस्कृति की अमिट छवि प्रस्तुत करता दिखाई दिया। 

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